राजा युधिष्ठिर, जिनके सगे-संबंधी नष्ट हो गए थे, हृदय से दुखी थे और किसी तरह राज्य का कामकाज चलाने लगे।
King Yudhishthira, whose relatives had been destroyed, was unhappy at heart and somehow began to manage the affairs of the kingdom.
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि नारदागमनपर्वणि श्राद्धदाने एकोनचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ३९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत नारदागमनपर्वमें श्राद्धदानविषयक उनतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३९॥
॥ आश्रमवासिकपर्व सम्पूर्ण॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥