श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 39: राजा युधिष्ठिरद्वारा धृतराष्ट्र, गान्धारी और कुन्ती—इन तीनोंकी हड्डियोंको गङ्गामें प्रवाहित कराना तथा श्राद्धकर्म करना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  15.39.19-20 
यो यदिच्छति यावच्च तावत् स लभते नर:।
शयनं भोजनं यानं मणिरत्नमथो धनम्॥ १९॥
यानमाच्छादनं भोगान् दासीश्च समलंकृता:।
ददौ राजा समुद्दिश्य तयोर्मात्रोर्महीपति:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उस समय जो जिस वस्तु की जितनी मात्रा में इच्छा करता, उसे उतनी ही मिल जाती थी। अपनी दोनों माताओं के हितार्थ राजा युधिष्ठिर ने उन्हें शय्या, भोजन, सवारी, रत्न, धन, वाहन, वस्त्र, नाना प्रकार के सुख और वस्त्राभूषणों से सुसज्जित दासियाँ प्रदान कीं॥ 19-20॥
 
At that time, whoever wanted anything in whatever quantity, he would get that much of it. For the sake of his two mothers, King Yudhishthira provided them with beds, food, rides, precious stones, wealth, vehicles, clothes, various kinds of pleasures and maids adorned with clothes and ornaments.॥ 19-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)