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mahabharat 15.38.14-15h: वे कुरुवंशी राजा, जिन्होंने पहले इस पृथ्वी पर राज्य किया था और फिर अन्त में कठोर तप किया था, ऐसी मृत्यु को क्यों प्राप्त हुए? ॥14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.38: नारदजीके सम्मुख युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिके लौकिक अग्निमें दग्ध हो जानेका वर्णन करते हुए विलाप और अन्य पाण्डवोंका भी रोदन   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 38: नारदजीके सम्मुख युधिष्ठिरका धृतराष्ट्र आदिके लौकिक अग्निमें दग्ध हो जानेका वर्णन करते हुए विलाप और अन्य पाण्डवोंका भी रोदन  »  श्लोक 14-15h
 
 
श्लोक  15.38.14-15h 
तथा तपस्विनस्तस्य राजर्षे: कौरवस्य ह॥ १४॥
कथमेवंविधो मृत्यु: प्रशास्य पृथिवीमिमाम्।
 
 
अनुवाद
वे कुरुवंशी राजा, जिन्होंने पहले इस पृथ्वी पर राज्य किया था और फिर अन्त में कठोर तप किया था, ऐसी मृत्यु को क्यों प्राप्त हुए? ॥14 1/2॥
 
Why did those Kuru dynasty kings, who had earlier ruled over this earth and then ultimately resorted to such rigorous penance, meet such a death? ॥14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)