श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 37: नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिके दावानलमें दग्ध हो जानेका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  15.37.8 
कथं च वर्तते चाद्य पिता मम स पार्थिव:।
श्रोतुमिच्छामि भगवन् यदि दृष्टस्त्वया नृप:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मेरे चाचा राजा धृतराष्ट्र इन दिनों कैसे हैं? हे प्रभु! यदि आपने उन्हें देखा हो, तो मैं उनके बारे में सुनना चाहता हूँ।॥8॥
 
How is my uncle King Dhritarashtra doing these days? O Lord! If you have seen him, I would like to hear about him. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)