श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 37: नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिके दावानलमें दग्ध हो जानेका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  15.37.7 
अपि दृष्टस्त्वया तत्र कुशली स कुरूद्वह:।
गान्धारी च पृथा चैव सूतपुत्रश्च संजय:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
क्या तुमने उन्हें भी देखा है? क्या श्रेष्ठ कौरव वहाँ कुशलपूर्वक हैं? क्या गांधारी, कुन्ती और सूतपुत्र संजय भी कुशलपूर्वक हैं?॥ 7॥
 
Have you seen them too? Are the best of the Kurus well there? Are Gandhari, Kunti and Sutaputra Sanjaya also well?॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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