Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.37.41-42h: "अहा! तुम्हें शर्म आनी चाहिए!" इस प्रकार अपनी निन्दा करके राजा युधिष्ठिर अत्यन्त दुःखी हो गये और अपनी दोनों भुजाएँ उठाकर, अपनी माता का स्मरण करके, अत्यन्त विलाप करने लगे। | mahabharat अध्याय 15.37: नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिके दावानलमें दग्ध हो जानेका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक करना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
"अहा! तुम्हें शर्म आनी चाहिए!" इस प्रकार अपनी निन्दा करके राजा युधिष्ठिर अत्यन्त दुःखी हो गये और अपनी दोनों भुजाएँ उठाकर, अपनी माता का स्मरण करके, अत्यन्त विलाप करने लगे।
"Oh! Shame on you!" Having thus criticized himself, King Yudhishthira became very sad and raising both his arms, remembering his mother, he began to weep profusely.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥