Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.37.38-39h: राजा! राजा धृतराष्ट्र, गांधारी और आपकी माता कुन्ती - ये तीनों अग्निपद को प्राप्त हो चुके हैं; अतः आपको उनके लिए शोक नहीं करना चाहिए। | mahabharat अध्याय 15.37: नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिके दावानलमें दग्ध हो जानेका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक करना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न शोचितव्यं राजेन्द्र स्वत: स पृथिवीपति:॥ ३८॥
प्राप्तवानग्निसंयोगं गान्धारी जननी च ते।
अनुवाद
राजा! राजा धृतराष्ट्र, गांधारी और आपकी माता कुन्ती - ये तीनों अग्निपद को प्राप्त हो चुके हैं; अतः आपको उनके लिए शोक नहीं करना चाहिए।
King! King Dhritarashtra, Gandhari and your mother Kunti - all three had themselves attained the state of Agni; therefore you should not mourn for them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥