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mahabharat 15.37.35-36h: भरतनन्दन! वन में विचरण करते समय अचानक राजा धृतराष्ट्र और उन स्त्रियों के मृत शरीर मेरी दृष्टि में आ गए। 35 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.37: नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिके दावानलमें दग्ध हो जानेका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.37.35-36h 
यदृच्छयानुव्रजता मया राज्ञ: कलेवरम्॥ ३५॥
तयोश्च देव्योरुभयोर्मया दृष्टानि भारत।
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! वन में विचरण करते समय अचानक राजा धृतराष्ट्र और उन स्त्रियों के मृत शरीर मेरी दृष्टि में आ गए। 35 1/2॥
 
Bharatnandan! While wandering in the forest, suddenly the dead bodies of King Dhritarashtra and those ladies were in my sight. 35 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)