श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 37: नारदजीसे धृतराष्ट्र आदिके दावानलमें दग्ध हो जानेका हाल जानकर युधिष्ठिर आदिका शोक करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  15.37.20 
दह्यत्सु मृगयूथेषु द्विजिह्वेषु समन्तत:।
वराहाणां च यूथेषु संश्रयत्सु जलाशयान्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हर जगह हिरणों और साँपों के झुंड जलने लगे। जंगली सूअर भागकर जलाशयों में शरण लेने लगे।
 
Everywhere, herds of deer and snakes started burning. Wild boars started fleeing and taking shelter in water bodies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)