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श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना  »  श्लोक 50-52h
 
 
श्लोक  15.36.50-52h 
द्रौपदीप्रमुखाश्चैव सर्वा: कौरवयोषित:॥ ५०॥
न्यायत: श्वशुरे वृत्तां प्रयुज्य प्रययुस्तत:।
श्वश्रूभ्यां समनुज्ञाता: परिष्वज्याभिनन्दिता:॥ ५१॥
संदिष्टाश्चेति कर्तव्यं प्रययुर्भर्तृभि: सह।
 
 
अनुवाद
द्रौपदी सहित सभी कौरव स्त्रियों ने अपने श्वसुरों को न्यायपूर्वक प्रणाम किया। फिर दोनों सासों ने उन्हें गले लगाया, आशीर्वाद दिया, विदा करने की अनुमति दी और उन्हें कर्तव्य का उपदेश भी दिया। इसके बाद वे अपने पतियों के साथ चली गईं।
 
All the Kaurava women including Draupadi bowed down to their fathers-in-law in a just manner. Then both the mothers-in-law embraced them, blessed them and gave them permission to leave and also preached them about their duties. After that they went with their husbands. 50-51 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)