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mahabharat 15.36.18: बेटा! मेरी ही तरह तुम्हारी माताएँ भी व्रत रखती हैं और सूखे पत्ते चबाकर जीवनयापन करती हैं। अब वे अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकतीं॥18॥   |   mahabharat अध्याय 15.36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  15.36.18 
मातरौ ते तथैवेमे शीर्णपर्णकृताशने।
मम तुल्यव्रते पुत्र न चिरं वर्तयिष्यत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
बेटा! मेरी ही तरह तुम्हारी माताएँ भी व्रत रखती हैं और सूखे पत्ते चबाकर जीवनयापन करती हैं। अब वे अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकतीं॥18॥
 
Son! Just like me, your mothers also observe fasts and live by chewing dry leaves. Now they cannot survive for long.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)