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mahabharat 15.36.12: कुरुश्रेष्ठ! नरेश्वर! राज्य के बहुत से शत्रु हैं; अतः सदैव यत्नपूर्वक उसकी रक्षा करनी चाहिए। 12॥   |   mahabharat अध्याय 15.36: व्यासजीकी आज्ञासे धृतराष्ट्र आदिका पाण्डवोंको विदा करना और पाण्डवोंका सदलबल हस्तिनापुरमें आना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.36.12 
एतद्धि नित्यं यत्नेन पदं रक्ष्यं नराधिप।
बहुप्रत्यर्थिकं ह्येतद् राज्यं नाम कुरूद्वह॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कुरुश्रेष्ठ! नरेश्वर! राज्य के बहुत से शत्रु हैं; अतः सदैव यत्नपूर्वक उसकी रक्षा करनी चाहिए। 12॥
 
Kurushrestha! Nareshwar! The state has many enemies; Therefore, it should always be protected diligently. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)