श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 32: व्यासजीके प्रभावसे कुरुक्षेत्रके युद्धमें मारे गये कौरव-पाण्डववीरोंका गङ्गाजीके जलसे प्रकट होना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  15.32.21 
धृतराष्ट्रस्तु तान् सर्वान् पश्यन् दिव्येन चक्षुषा।
मुमुदे भरतश्रेष्ठ प्रसादात् तस्य वै मुने:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! व्यासजी की कृपा से प्राप्त दिव्य नेत्रों से अपने समस्त पुत्रों और सम्बन्धियों को देखकर राजा धृतराष्ट्र आनंदित हो गए॥21॥
 
Bharatshrestha! King Dhritarashtra became ecstatic after seeing all his sons and relatives with the divine eyes given by the grace of sage Vyas. 21॥
 
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि पुत्रदर्शनपर्वणि भीष्मादिदर्शने द्वात्रिंशोऽध्याय:॥ ३२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत पुत्रदर्शनपर्वमें भीष्म आदिका दर्शनविषयक बत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)