श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 32: व्यासजीके प्रभावसे कुरुक्षेत्रके युद्धमें मारे गये कौरव-पाण्डववीरोंका गङ्गाजीके जलसे प्रकट होना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  15.32.18 
दिव्यज्ञानबलोपेता गान्धारी च यशस्विनी।
ददर्श पुत्रांस्तान् सर्वान् ये चान्येऽपि मृधे हता:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यशस्विनी गांधारी भी दिव्य ज्ञान से संपन्न थीं। उन दोनों ने युद्ध में अपने पुत्रों तथा अन्य सभी संबंधियों को मारा हुआ देखा ॥18॥
 
Yashaswini Gandhari was also endowed with divine knowledge. Both of them saw their sons and all their other relatives killed in the war. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)