श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 32: व्यासजीके प्रभावसे कुरुक्षेत्रके युद्धमें मारे गये कौरव-पाण्डववीरोंका गङ्गाजीके जलसे प्रकट होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  15.32.1 
वैशम्पायन उवाच
ततो निशायां प्राप्तायां कृतसायाह्निकक्रिया:।
व्यासमभ्यगमन् सर्वे ये तत्रासन् समागता:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'हे जनमेजय! तत्पश्चात् जब रात्रि होने वाली थी, तब वहाँ आये हुए सभी लोग, संध्या के नित्य कर्मों से निवृत्त होकर भगवान व्यासजी के पास गये।
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! Thereafter, when the night was about to set in, all the people who had come there, after completing their daily rituals of the evening, went to Lord Vyasa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)