श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 31: व्यासजीके द्वारा धृतराष्ट्र आदिके पूर्वजन्मका परिचय तथा उनके कहनेसे सब लोगोंका गङ्गा-तटपर जाना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  15.31.23 
राजा च पाण्डवै: सार्धमिष्टे देशे सहानुग:।
निवासमकरोद् धीमान् सस्त्रीवृद्धपुर:सर:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान राजा धृतराष्ट्र ने अपनी स्त्रियों और वृद्धों को आगे भेज दिया और पाण्डवों तथा उनके सेवकों के साथ इच्छित स्थान पर ठहर गये।
 
The wise king Dhritarashtra sent his women and the aged persons ahead and stayed at the desired place along with the Pandavas and their servants.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd