श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 31: व्यासजीके द्वारा धृतराष्ट्र आदिके पूर्वजन्मका परिचय तथा उनके कहनेसे सब लोगोंका गङ्गा-तटपर जाना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  15.31.11 
मरुद्‍गणाद् भीमसेनं बलवन्तमरिंदमम्।
विद्धि त्वं तु नरमृषिमिमं पार्थं धनंजयम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
शत्रुओं का दमन करने वाले महाबली भीमसेन को मरुद्गणों के अंश से उत्पन्न हुआ समझो। इस कुन्तीपुत्र धनंजय को प्राचीन ऋषि 'पुरुष' समझो। 11॥
 
Consider the mighty Bhimsen, who subjugated the enemies, to be born from the part of the Marudganas. Consider this Kunti's son Dhananjay as an ancient sage 'male'. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)