vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व
»
अध्याय 30: कुन्तीका कर्णके जन्मका गुप्त रहस्य बताना और व्यासजीका उन्हें सान्त्वना देना
»
श्लोक 22
श्लोक
15.30.22
सन्ति देवनिकायाश्च संकल्पाज्जनयन्ति ये।
वाचा दृष्ट्या तथा स्पर्शात् संघर्षेणेति पञ्चधा॥ २२॥
अनुवाद
‘ऐसे अनेक देव समूह हैं जो मन, वचन, दृष्टि, स्पर्श और मैथुन इन पाँच विधियों से पुत्र उत्पन्न करते हैं ॥22॥
‘There are many such groups of gods who produce sons by the five methods of thought, word, sight, touch and intercourse. ॥22॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas