श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 3: राजा धृतराष्ट्रका गान्धारीके साथ वनमें जानेके लिये उद्योग एवं युधिष्ठिरसे अनुमति देनेके लिये अनुरोध तथा युधिष्ठिर और कुन्ती आदिका दु:खी होना  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  15.3.71 
अष्टमो ह्यद्य कालोऽयमाहारस्य कृतस्य मे।
येनाहं कुरुशार्दूल शक्नोमि न विचेष्टितुम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
आज चौथा दिन है, आठवीं बार भोजन किया है। हे कुरुश्रेष्ठ! इस कारण मैं इतना थक गया हूँ कि कुछ भी करने में असमर्थ हूँ। 71।
 
This is the fourth day since I last ate food, the eighth time. O best of Kurus! Because of this I am so tired that I am unable to do anything. 71.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)