धृतराष्ट्र बोले, "कमल-नयन पाण्डुपुत्र! कृपया मेरे शरीर पर पुनः अपने हाथ फेरें और मुझे आलिंगनबद्ध करें। आपके स्पर्श से मानो मेरे शरीर में सजीवता आ गई है।"
Dhritarashtra said—Lotus-eyed Pandu son! Please run your hands over my body again and embrace me. It is as if my body comes to life with your soothing touch.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥