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mahabharat 15.28.9: महाराज! भरतनन्दन! किसी से वैर न करना, सत्य बोलना और क्रोध का सर्वथा त्याग करना - ये तीन गुण समस्त प्राणियों में श्रेष्ठ माने गए हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 15.28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  15.28.9 
एतद्धि त्रितयं श्रेष्ठं सर्वभूतेषु भारत।
निर्वैरता महाराज सत्यमक्रोध एव च॥ ९॥
 
 
अनुवाद
महाराज! भरतनन्दन! किसी से वैर न करना, सत्य बोलना और क्रोध का सर्वथा त्याग करना - ये तीन गुण समस्त प्राणियों में श्रेष्ठ माने गए हैं॥9॥
 
Maharaj! Bharatnandan! Not having enmity with anyone, speaking the truth and giving up anger completely – these three qualities are considered the best among all living beings. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)