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mahabharat 15.28.4: क्या आप अपनी बुद्धि को दृढ़ करके वनवास के कठोर नियमों का पालन करते हैं? क्या आपकी पुत्रवधू गांधारी कभी शोक से व्याकुल होती है?॥4॥   |   mahabharat अध्याय 15.28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  15.28.4 
कच्चिद् बुद्धिं दृढां कृत्वा चरस्यारण्यकं विधिम्।
कच्चिद् वधूश्च गान्धारी न शोकेनाभिभूयते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
क्या आप अपनी बुद्धि को दृढ़ करके वनवास के कठोर नियमों का पालन करते हैं? क्या आपकी पुत्रवधू गांधारी कभी शोक से व्याकुल होती है?॥4॥
 
‘Do you follow the strict rules of exile by strengthening your intellect? Does your daughter-in-law Gandhari ever get overcome by grief?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)