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mahabharat 15.28.25: हे भोले राजा! बोलो, तुम मुझसे क्या चाहते हो? तुम क्या देखना, सुनना या छूना चाहते हो? मैं उसे पूरा करूँगा॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 15.28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  15.28.25 
किमिच्छसि महीपाल मत्त: प्राप्तुमभीप्सितम्।
द्रष्टुं स्प्रष्टुमथ श्रोतुं तत्कर्ताऽस्मि तवानघ॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे भोले राजा! बोलो, तुम मुझसे क्या चाहते हो? तुम क्या देखना, सुनना या छूना चाहते हो? मैं उसे पूरा करूँगा॥ 25॥
 
‘Innocent King! Tell me, what do you want from me? What do you wish to see, hear or touch? I will fulfill it.॥ 25॥
 
इति श्रीमहाभारते आश्रमवासिके पर्वणि आश्रमवासपर्वणि व्यासवाक्ये अष्टाविंशोऽध्याय:॥ २८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आश्रमवासिकपर्वके अन्तर्गत आश्रमवासपर्वमें व्यासवाक्यविषयक अट्ठाईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)