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सत्येन संवर्धयति यो दमेन शमेन च।
अहिंसया च दानेन तप्यमान: सनातन:॥ १७॥
अनुवाद
जो सत्य, इन्द्रिय संयम, आत्मसंयम, अहिंसा और दान के द्वारा संसार की उन्नति का पालन करता है, वह सनातन धर्मी विदुर से भिन्न नहीं है ॥17॥
The one who pursues the development of the world through truth, control of senses, self-control, non-violence and charity is no different from Sanatan Dharma Vidur. 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥