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mahabharat 15.28.16: महाराज! आपके भाई विदुर भी देवताओं के देवता, सनातन धर्म, थे। धर्म का मनन और धारण मन से होता है, इसलिए विद्वान पुरुष इसे धर्म के नाम से जानते हैं।   |   mahabharat अध्याय 15.28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  15.28.16 
भ्राता तव महाराज देवदेव: सनातन:।
धारणान्मनसा ध्यानाद् यं धर्मं कवयो विदु:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आपके भाई विदुर भी देवताओं के देवता, सनातन धर्म, थे। धर्म का मनन और धारण मन से होता है, इसलिए विद्वान पुरुष इसे धर्म के नाम से जानते हैं।
 
‘Maharaj! Your brother Vidur was the god of the gods as well, Sanatan Dharma. Dharma is imbibed and meditated upon through the mind, hence learned men know it by the name of Dharma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)