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mahabharat 15.28.13: देवताओं में बृहस्पति और दैत्यों में शुक्राचार्य भी महात्मा विदुर के समान बुद्धिमान नहीं हैं॥13॥   |   mahabharat अध्याय 15.28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 28: महर्षि व्यासका धृतराष्ट्रसे कुशल पूछते हुए विदुर और युधिष्ठिरकी धर्मरूपताका प्रतिपादन करना और उनसे अभीष्ट वस्तु माँगनेके लिये कहना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  15.28.13 
बृहस्पतिर्वा देवेषु शुक्रो वाप्यसुरेषु च।
न तथा बुद्धिसम्पन्नो यथा स पुरुषर्षभ:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
देवताओं में बृहस्पति और दैत्यों में शुक्राचार्य भी महात्मा विदुर के समान बुद्धिमान नहीं हैं॥13॥
 
‘Even Brihaspati among the gods and Shukraacharya among the demons are not as intelligent as the great man Vidur.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)