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mahabharat 15.27.3: हे मनुष्यों के स्वामी! पाण्डवों ने अपने बहुमूल्य पलंग त्याग दिए और अपनी माता के चारों ओर भूमि पर सो गए।   |   mahabharat अध्याय 15.27: युधिष्ठिर आदिका ऋषियोंके आश्रम देखना, कलश आदि बाँटना और धृतराष्ट्रके पास आकर बैठना, उन सबके पास अन्यान्य ऋषियोंसहित महर्षि व्यासका आगमन   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 27: युधिष्ठिर आदिका ऋषियोंके आश्रम देखना, कलश आदि बाँटना और धृतराष्ट्रके पास आकर बैठना, उन सबके पास अन्यान्य ऋषियोंसहित महर्षि व्यासका आगमन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  15.27.3 
पाण्डवास्त्वभितो मातुर्धरण्यां सुषुपुस्तदा।
उत्सृज्य तु महार्हाणि शयनानि नराधिप॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! पाण्डवों ने अपने बहुमूल्य पलंग त्याग दिए और अपनी माता के चारों ओर भूमि पर सो गए।
 
O lord of men! The Pandavas left their precious beds and slept on the ground around their mother.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)