Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.27.20: उनसे घिरे हुए कुरु राजा धृतराष्ट्र उसी प्रकार सुन्दर दिख रहे थे, जैसे देवताओं से घिरे होने पर दिव्य तेज वाले बृहस्पति दिखते हैं। | mahabharat अध्याय 15.27: युधिष्ठिर आदिका ऋषियोंके आश्रम देखना, कलश आदि बाँटना और धृतराष्ट्रके पास आकर बैठना, उन सबके पास अन्यान्य ऋषियोंसहित महर्षि व्यासका आगमन । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स तै: परिवृतो राजा शुशुभेऽतीव कौरव:।
बिभ्रद् ब्राह्मीं श्रियं दीप्तां देवैरिव बृहस्पति:॥ २०॥
अनुवाद
उनसे घिरे हुए कुरु राजा धृतराष्ट्र उसी प्रकार सुन्दर दिख रहे थे, जैसे देवताओं से घिरे होने पर दिव्य तेज वाले बृहस्पति दिखते हैं।
Surrounded by them, the Kuru king Dhritarashtra looked as beautiful as Brihaspati, who possesses the radiant divine radiance, looks when surrounded by gods.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥