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mahabharat 15.27.2: उस समय उन लोगों में विचित्र शब्दों और विविध श्रुतियों से युक्त धर्म और अर्थशास्त्र पर चर्चा चल रही थी।   |   mahabharat अध्याय 15.27: युधिष्ठिर आदिका ऋषियोंके आश्रम देखना, कलश आदि बाँटना और धृतराष्ट्रके पास आकर बैठना, उन सबके पास अन्यान्य ऋषियोंसहित महर्षि व्यासका आगमन   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 27: युधिष्ठिर आदिका ऋषियोंके आश्रम देखना, कलश आदि बाँटना और धृतराष्ट्रके पास आकर बैठना, उन सबके पास अन्यान्य ऋषियोंसहित महर्षि व्यासका आगमन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  15.27.2 
ततस्तत्र कथाश्चासंस्तेषां धर्मार्थलक्षणा:।
विचित्रपदसंचारा नानाश्रुतिभिरन्विता:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उस समय उन लोगों में विचित्र शब्दों और विविध श्रुतियों से युक्त धर्म और अर्थशास्त्र पर चर्चा चल रही थी।
 
At that time discussions on religion and economics containing strange words and various Shrutis (scriptures) were going on among those people.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)