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mahabharat 15.27.18: युधिष्ठिर ने अपना नाम स्मरण करके राजा धृतराष्ट्र को प्रणाम किया और बैठने का आदेश मिलने पर वे कुशा के आसन पर बैठ गये।   |   mahabharat अध्याय 15.27: युधिष्ठिर आदिका ऋषियोंके आश्रम देखना, कलश आदि बाँटना और धृतराष्ट्रके पास आकर बैठना, उन सबके पास अन्यान्य ऋषियोंसहित महर्षि व्यासका आगमन   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 27: युधिष्ठिर आदिका ऋषियोंके आश्रम देखना, कलश आदि बाँटना और धृतराष्ट्रके पास आकर बैठना, उन सबके पास अन्यान्य ऋषियोंसहित महर्षि व्यासका आगमन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  15.27.18 
स तमभ्यर्च्य राजानं नाम संश्राव्य चात्मन:।
निषीदेत्यभ्यनुज्ञातो बृस्यामुपविवेश ह॥ १८॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने अपना नाम स्मरण करके राजा धृतराष्ट्र को प्रणाम किया और बैठने का आदेश मिलने पर वे कुशा के आसन पर बैठ गये।
 
Yudhishthira recited his name and bowed to King Dhritarashtra and on being commanded to sit, he sat down on a kusha seat.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)