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mahabharat 15.25.18: वैशम्पायनजी बोले - जब संजय द्वारा सब तपस्वियों का इस प्रकार परिचय कराया गया और वे अपनी-अपनी कुटिया में चले गए, तब कुरुवंश में ज्येष्ठ और श्रेष्ठ राजा धृतराष्ट्र ने उन पुरुषपुत्रों से मिलकर उनका कुशल-क्षेम पूछा॥18॥   |   mahabharat अध्याय 15.25: संजयका ऋषियोंसे पाण्डवों, उनकी पत्नियों तथा अन्यान्य स्त्रियोंका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 25: संजयका ऋषियोंसे पाण्डवों, उनकी पत्नियों तथा अन्यान्य स्त्रियोंका परिचय देना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  15.25.18 
वैशम्पायन उवाच
एवं स राजा कुरुवृद्धवर्य:
समागतस्तैर्नरदेवपुत्रै:।
पप्रच्छ सर्वं कुशलं तदानीं
गतेषु सर्वेष्वथ तापसेषु॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी बोले - जब संजय द्वारा सब तपस्वियों का इस प्रकार परिचय कराया गया और वे अपनी-अपनी कुटिया में चले गए, तब कुरुवंश में ज्येष्ठ और श्रेष्ठ राजा धृतराष्ट्र ने उन पुरुषपुत्रों से मिलकर उनका कुशल-क्षेम पूछा॥18॥
 
Vaishmpayana said: After all the ascetics had thus been introduced to each other by Sanjaya, and had gone to their huts, then King Dhritarashtra, the oldest and the greatest of the Kuru clan, met those sons of men and asked about their well-being.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)