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mahabharat 15.25.13: यहाँ चम्पा पुष्पों की माला के समान गौर वर्ण वाली जो सुन्दरी विराजमान है, वह मगध के विख्यात राजा जरासंध की पुत्री और माद्री के छोटे पुत्र सहदेव की पत्नी है ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 15.25: संजयका ऋषियोंसे पाण्डवों, उनकी पत्नियों तथा अन्यान्य स्त्रियोंका परिचय देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.25.13 
इयं च राज्ञो मगधाधिपस्य
सुता जरासन्ध इति श्रुतस्य।
यवीयसो माद्रवतीसुतस्य
भार्या मता चम्पकदामगौरी॥ १३॥
 
 
अनुवाद
यहाँ चम्पा पुष्पों की माला के समान गौर वर्ण वाली जो सुन्दरी विराजमान है, वह मगध के विख्यात राजा जरासंध की पुत्री और माद्री के छोटे पुत्र सहदेव की पत्नी है ॥13॥
 
The beautiful lady sitting here with a fair complexion like a garland of Champa flowers is the daughter of the renowned King of Magadh, Jarasandha, and the wife of Sahadeva, the younger son of Madri. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)