Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.21.9-10: उसे कभी शांति नहीं मिलती थी, क्योंकि वह अपने वृद्ध मामा महाराज धृतराष्ट्र, महारथी गांधारी और अत्यन्त बुद्धिमान विदुर, जिनके पुत्र मारे गए थे, की बहुत चिंता करता था। उसे न तो राजकाज में रुचि थी, न स्त्रियों में। वेदों के अध्ययन में भी उसकी रुचि नहीं थी। 9-10॥ | mahabharat अध्याय 15.21: धृतराष्ट्र आदिके लिये पाण्डवों तथा पुरवासियोंकी चिन्ता । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथैव वृद्धं पितरं हतपुत्रं जनेश्वरम्।
गान्धारीं च महाभागां विदुरं च महामतिम्॥ ९॥
नैषां बभूव सम्प्रीतिस्तान् विचिन्तयतां तदा।
न राज्ये न च नारीषु न वेदाध्ययनेषु च॥ १०॥
अनुवाद
उसे कभी शांति नहीं मिलती थी, क्योंकि वह अपने वृद्ध मामा महाराज धृतराष्ट्र, महारथी गांधारी और अत्यन्त बुद्धिमान विदुर, जिनके पुत्र मारे गए थे, की बहुत चिंता करता था। उसे न तो राजकाज में रुचि थी, न स्त्रियों में। वेदों के अध्ययन में भी उसकी रुचि नहीं थी। 9-10॥
He never felt at peace because he worried so much about the old uncle Maharaj Dhritarashtra, the great warrior Gandhari and the extremely intelligent Vidur, whose sons had been killed. He was neither interested in governance nor in women. He was not even interested in studying the Vedas. 9-10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥