Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.19.17: राजा धृतराष्ट्र के शरीर का मांस सूख गया। वे हड्डियों और चर्म से आच्छादित हो गए, सिर पर जटाएँ, शरीर पर मृगचर्म और छाल हो गई। वे महर्षियों के समान घोर तप करने लगे। उनके मन के समस्त मोह दूर हो गए॥17॥   |   mahabharat अध्याय 15.19: धृतराष्ट्र आदिका गङ्गातटपर निवास करके वहाँसे कुरुक्षेत्रमें जाना और शतयूपके आश्रमपर निवास करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 19: धृतराष्ट्र आदिका गङ्गातटपर निवास करके वहाँसे कुरुक्षेत्रमें जाना और शतयूपके आश्रमपर निवास करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  15.19.17 
त्वगस्थिभूत: परिशुष्कमांसो
जटाजिनी वल्कलसंवृताङ्ग:।
स पार्थिवस्तत्र तपश्चचार
महर्षिवत्तीव्रमपेतमोह:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
राजा धृतराष्ट्र के शरीर का मांस सूख गया। वे हड्डियों और चर्म से आच्छादित हो गए, सिर पर जटाएँ, शरीर पर मृगचर्म और छाल हो गई। वे महर्षियों के समान घोर तप करने लगे। उनके मन के समस्त मोह दूर हो गए॥17॥
 
The flesh of King Dhritarashtra's body dried up. He became covered with bones and skin, matted hair on his head, deerskin and bark on his body and started performing intense penance like the great sages. All the delusions of his mind were gone.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)