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mahabharat 15.19.16: नरेश्वर! वे दोनों स्त्रियाँ अपनी इन्द्रियों को वश में करके मन, वाणी, कर्म और नेत्रों से भी महान तप में लग गईं॥16॥   |   mahabharat अध्याय 15.19: धृतराष्ट्र आदिका गङ्गातटपर निवास करके वहाँसे कुरुक्षेत्रमें जाना और शतयूपके आश्रमपर निवास करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 19: धृतराष्ट्र आदिका गङ्गातटपर निवास करके वहाँसे कुरुक्षेत्रमें जाना और शतयूपके आश्रमपर निवास करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  15.19.16 
कर्मणा मनसा वाचा चक्षुषा चैव ते नृप।
संनियम्येन्द्रियग्राममास्थिते परमं तप:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! वे दोनों स्त्रियाँ अपनी इन्द्रियों को वश में करके मन, वाणी, कर्म और नेत्रों से भी महान तप में लग गईं॥16॥
 
Nareshwar! Both of those women, having controlled their senses, engaged in great penance through mind, speech, actions and even eyes. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)