Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.17.3: हे पुरुषश्रेष्ठ! मैं चाहता था कि पाण्डु वंश का किसी भी प्रकार नाश न हो और आपकी कीर्ति भी नष्ट न हो। इसीलिए मैंने आपको युद्ध के लिए प्रोत्साहित किया था। | mahabharat अध्याय 15.17: कुन्तीका पाण्डवोंको उनके अनुरोधका उत्तर । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कथं पाण्डोर्न नश्येत संतति: पुरुषर्षभा:।
यशश्च वो न नश्येत इति चोद्धर्षणं कृतम्॥ ३॥
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! मैं चाहता था कि पाण्डु वंश का किसी भी प्रकार नाश न हो और आपकी कीर्ति भी नष्ट न हो। इसीलिए मैंने आपको युद्ध के लिए प्रोत्साहित किया था।
O best of men! I wanted that the progeny of Pandu should not be destroyed in any way and your fame should also not be destroyed. That is why I encouraged you for the war.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥