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mahabharat 15.17.19: पुत्रो! मैं अपने पुत्र के द्वारा प्राप्त राज्य का फल भोगना नहीं चाहती। प्रभु! मैं तपस्या द्वारा पुण्यवान पति के लोक में जाना चाहती हूँ। 19॥   |   mahabharat अध्याय 15.17: कुन्तीका पाण्डवोंको उनके अनुरोधका उत्तर   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 17: कुन्तीका पाण्डवोंको उनके अनुरोधका उत्तर  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  15.17.19 
नाहं राज्यफलं पुत्रा: कामये पुत्रनिर्जितम्।
पतिलोकानहं पुण्यान् कामये तपसा विभो॥ १९॥
 
 
अनुवाद
पुत्रो! मैं अपने पुत्र के द्वारा प्राप्त राज्य का फल भोगना नहीं चाहती। प्रभु! मैं तपस्या द्वारा पुण्यवान पति के लोक में जाना चाहती हूँ। 19॥
 
Sons! I do not want to enjoy the fruits of my son's won kingdom. Lord! I wish to go to the world of a virtuous husband through penance. 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)