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mahabharat 15.16.21: भगवान् श्रीकृष्ण के मुख से आपके विचार सुनकर ही मैंने अनेक राजाओं को मारकर यह राज्य प्राप्त किया है॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 15.16: धृतराष्ट्रका पुरवासियोंको लौटाना और पाण्डवोंके अनुरोध करनेपर भी कुन्तीका वनमें जानेसे न रुकना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.16.21 
निहत्य पृथिवीपालान् राज्यं प्राप्तमिदं मया।
तव प्रज्ञामुपश्रुत्य वासुदेवान्नरर्षभात्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
भगवान् श्रीकृष्ण के मुख से आपके विचार सुनकर ही मैंने अनेक राजाओं को मारकर यह राज्य प्राप्त किया है॥ 21॥
 
It is only after hearing your thoughts from the mouth of the Supreme Personality of Godhead, Sri Krishna, that I have killed many kings and obtained this kingdom.॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)