Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.16.15-16h: शत्रुसूदन! मेरी पुत्रवधू द्रौपदी से सदैव प्रेम रखना। कौरवश्रेष्ठ! भीमसेन, अर्जुन और नकुल को सदैव प्रसन्न रखना। आज से कुरुवंश का भार तुम्हारे ऊपर है। | mahabharat अध्याय 15.16: धृतराष्ट्रका पुरवासियोंको लौटाना और पाण्डवोंके अनुरोध करनेपर भी कुन्तीका वनमें जानेसे न रुकना । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शत्रुसूदन! मेरी पुत्रवधू द्रौपदी से सदैव प्रेम रखना। कौरवश्रेष्ठ! भीमसेन, अर्जुन और नकुल को सदैव प्रसन्न रखना। आज से कुरुवंश का भार तुम्हारे ऊपर है।
Shatrusudan! Always love my daughter-in-law Draupadi. Best of the Kurus! Always keep Bhimsen, Arjun and Nakul happy. From today onwards, the burden of the Kuru clan is on you. 15 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥