Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.16.13: हे शत्रु संहारक! ऐसी स्थिति में मैं क्या कर सकता हूँ? यह मेरा बड़ा दोष है कि मैंने आपको सूर्यपुत्र कर्ण से परिचित नहीं कराया।   |   mahabharat अध्याय 15.16: धृतराष्ट्रका पुरवासियोंको लौटाना और पाण्डवोंके अनुरोध करनेपर भी कुन्तीका वनमें जानेसे न रुकना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 16: धृतराष्ट्रका पुरवासियोंको लौटाना और पाण्डवोंके अनुरोध करनेपर भी कुन्तीका वनमें जानेसे न रुकना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  15.16.13 
एवं गते तु किं शक्यं मया कर्तुमरिंदम।
मम दोषोऽयमत्यर्थं ख्यापितो यन्न सूर्यज:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रु संहारक! ऐसी स्थिति में मैं क्या कर सकता हूँ? यह मेरा बड़ा दोष है कि मैंने आपको सूर्यपुत्र कर्ण से परिचित नहीं कराया।
 
O enemy destroyer! What can I do in such a situation? It is my great fault that I did not introduce you to the son of Sun, Karna. 13.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)