Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.14.11: जैसे बादल जल की धाराएँ बरसाकर खेतों को हरा-भरा कर देता है, वैसे ही राजा धृतराष्ट्र रूपी बादल ने धन की धाराएँ बरसाकर ब्राह्मण रूपी खेतों को तृप्त और हरा-भरा कर दिया॥11॥ | mahabharat अध्याय 15.14: राजा धृतराष्ट्रके द्वारा मृत व्यक्तियोंके लिये श्राद्ध एवं विशाल दान-यज्ञका अनुष्ठान । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं स वसुधाराभिर्वर्षमाणो नृपाम्बुद:।
तर्पयामास विप्रांस्तान् वर्षन् सस्यमिवाम्बुद:॥ ११॥
अनुवाद
जैसे बादल जल की धाराएँ बरसाकर खेतों को हरा-भरा कर देता है, वैसे ही राजा धृतराष्ट्र रूपी बादल ने धन की धाराएँ बरसाकर ब्राह्मण रूपी खेतों को तृप्त और हरा-भरा कर दिया॥11॥
Just as a cloud makes the fields green by pouring its torrents of water, similarly the cloud in the form of King Dhritarashtra made the fields in the form of Brahmins satisfied and green by raining a torrent of wealth. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥