श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 13: विदुरका धृतराष्ट्रको युधिष्ठिरका उदारतापूर्ण उत्तर सुनाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  15.13.5 
भीमश्च सर्वदु:खानि संस्मृत्य बहुलान्युत।
कृच्छ्रादिव महाबाहुरनुजज्ञे विनि:श्वसन्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
परन्तु महाबाहु भीमसेन ने अपने पूर्वजन्म के अनेक कष्टों का स्मरण करके, गहरी साँस लेकर, बड़ी कठिनाई से धन देने की अनुमति दी।
 
But the mighty-armed Bhimasena, remembering all the previous afflictions, which are many in number, taking a deep breath, permitted the money with great difficulty.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)