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mahabharat 15.12.10: भीमसेन को अत्यन्त दुःखी होने के कारण जो ईर्ष्या प्रकट की है, उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए। यह बात आप राजा से अवश्य कहें।॥10॥   |   mahabharat अध्याय 15.12: अर्जुनका भीमको समझाना और युधिष्ठिरका धृतराष्ट्रको यथेष्ट धन देनेकी स्वीकृति प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.12.10 
यन्मात्सर्यमयं भीम: करोति भृशदु:खित:।
न तन्मनसि कर्तव्यमिति वाच्य: स पार्थिव:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन को अत्यन्त दुःखी होने के कारण जो ईर्ष्या प्रकट की है, उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए। यह बात आप राजा से अवश्य कहें।॥10॥
 
Bhimsena should not take the jealousy expressed by him due to being very sad. You must tell this to the king.'॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)