Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 15.11.24-25h: पार्थ! क्या तुम उस समय को भूल गए हो जब यह दुष्ट और कलंकित धृतराष्ट्र जुआ खेलने के बाद विदुरजी से बार-बार पूछा करते थे कि, "हमने इस जुए में क्या जीता है?"॥24 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  15.11.24-25h 
किं ते तद् विस्मृतं पार्थ यदेष कुलपांसन:॥ २४॥
दुर्बुद्धिर्विदुरं प्राह द्यूते किं जितमित्युत।
 
 
अनुवाद
पार्थ! क्या तुम उस समय को भूल गए हो जब यह दुष्ट और कलंकित धृतराष्ट्र जुआ खेलने के बाद विदुरजी से बार-बार पूछा करते थे कि, "हमने इस जुए में क्या जीता है?"॥24 1/2॥
 
Partha, have you forgotten the time when this wicked and disreputable Dhritarashtra, after starting the gambling, would ask Vidurji again and again, "What have we won in this gamble?"॥ 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)