Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.11.21-23h: उन दिनों धृतराष्ट्र का हम पर प्रेम कहाँ चला गया था? जब तुम्हारे आभूषण उतारकर, शरीर पर काले मृगचर्म ओढ़कर तुम द्रौपदी के साथ राजा के पास गए थे, उस समय द्रोणाचार्य और भीष्म कहाँ थे? सोमदत्त कहाँ गया था? | mahabharat अध्याय 15.11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन दिनों धृतराष्ट्र का हम पर प्रेम कहाँ चला गया था? जब तुम्हारे आभूषण उतारकर, शरीर पर काले मृगचर्म ओढ़कर तुम द्रौपदी के साथ राजा के पास गए थे, उस समय द्रोणाचार्य और भीष्म कहाँ थे? सोमदत्त कहाँ गया था?
Where did Dhritarashtra's love for us go in those days? When your ornaments and jewellery were taken off and you covered your body with black deerskin and went to the king with Draupadi, where were Dronacharya and Bhishma at that time? Where did Somdatta go?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥