Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.11.20-21h: ‘उस पुराने वैर को, उस बारह वर्षों के वनवास को तथा उस एक वर्ष के घोर अज्ञातवास को, जिसने द्रौपदी के दुःख को बढ़ा दिया था, आपने अचानक कैसे भुला दिया?॥ 20 1/2॥ | mahabharat अध्याय 15.11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘उस पुराने वैर को, उस बारह वर्षों के वनवास को तथा उस एक वर्ष के घोर अज्ञातवास को, जिसने द्रौपदी के दुःख को बढ़ा दिया था, आपने अचानक कैसे भुला दिया?॥ 20 1/2॥
‘How did you suddenly forget that old enmity, that twelve years of exile and that one year of intense incognito living which increased the grief of Draupadi?॥ 20 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥