Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 15.11.18-19h: पुरुषसिंह! मेरा विचार है कि कुरुवंशी राजा धृतराष्ट्र को उपर्युक्त महापुरुषों का श्राद्ध नहीं करना चाहिए। हमारे शत्रुओं को इसके लिए हमारी निन्दा नहीं करनी चाहिए। | mahabharat अध्याय 15.11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध । mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्राद्धानि पुरुषव्याघ्र मा प्रादात् कौरवो नृप:॥ १८॥
इति मे वर्तते बुद्धिर्मा नो निन्दन्तु शत्रव:।
अनुवाद
पुरुषसिंह! मेरा विचार है कि कुरुवंशी राजा धृतराष्ट्र को उपर्युक्त महापुरुषों का श्राद्ध नहीं करना चाहिए। हमारे शत्रुओं को इसके लिए हमारी निन्दा नहीं करनी चाहिए।
Purushasingh! I think that the Kuru dynasty king Dhritarashtra should not perform the shraddha of the above mentioned great men. Our enemies should not criticize us for this. 18 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥