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mahabharat 15.11.12-13h: एक समय की बात है, जो राजा सम्पूर्ण जगत् का अन्नदाता था, उसके सभी मंत्री और सहायक शत्रुओं द्वारा मारे गए और आज वह वन में जाना चाहता है।॥12 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  15.11.12-13h 
योऽसौ पृथिव्या: कृत्स्नाया भर्ता भूत्वा नराधिप:॥ १२॥
परैर्विनिहतामात्यो वनं गन्तुमभीप्सति।
 
 
अनुवाद
एक समय की बात है, जो राजा सम्पूर्ण जगत् का अन्नदाता था, उसके सभी मंत्री और सहायक शत्रुओं द्वारा मारे गए और आज वह वन में जाना चाहता है।॥12 1/2॥
 
Once upon a time, the king who was the breadwinner of the whole world, all his ministers and helpers were killed by the enemies and today he wants to go to the forest.॥ 12 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)