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mahabharat 15.11.11-12h: महाबाहो! यह सौभाग्य की बात है कि आज राजा धृतराष्ट्र हमसे धन की भिक्षा मांग रहे हैं। समय का परिवर्तन तो देखो। जिनसे हम पहले भिक्षा मांगते थे, आज वे ही हमसे भिक्षा मांग रहे हैं॥ 11 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 15.11: धृतराष्ट्रका विदुरके द्वारा युधिष्ठिरसे श्राद्धके लिये धन माँगना, अर्जुनकी सहमति और भीमसेनका विरोध   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  15.11.11-12h 
दिष्टॺा त्वद्य महाबाहो धृतराष्ट्र: प्रयाचते॥ ११॥
याचितो य: पुरास्माभि: पश्य कालस्य पर्ययम्।
 
 
अनुवाद
महाबाहो! यह सौभाग्य की बात है कि आज राजा धृतराष्ट्र हमसे धन की भिक्षा मांग रहे हैं। समय का परिवर्तन तो देखो। जिनसे हम पहले भिक्षा मांगते थे, आज वे ही हमसे भिक्षा मांग रहे हैं॥ 11 1/2॥
 
‘Mahabaho! It is a matter of good fortune that today King Dhritarashtra is begging for wealth from us. Look at the change of time. Those from whom we used to beg earlier, are the ones begging from us today.॥ 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)