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mahabharat 15.10.9: फिर धीरे-धीरे अपने वियोग के दुःख को दूर करके, वे सब आपस में बातचीत करके अपनी-अपनी राय कहने लगे।   |   mahabharat अध्याय 15.10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना   ।   mahabharat पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 15: आश्रमवासिक पर्व  »  अध्याय 10: प्रजाकी ओरसे साम्ब नामक ब्राह्मणका धृतराष्ट्रको सान्त्वनापूर्ण उत्तर देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  15.10.9 
ते विनीय तमायासं धृतराष्ट्रवियोगजम्।
शनै: शनैस्तदान्योन्यमब्रुवन् सम्मतान्युत॥ ९॥
 
 
अनुवाद
फिर धीरे-धीरे अपने वियोग के दुःख को दूर करके, वे सब आपस में बातचीत करके अपनी-अपनी राय कहने लगे।
 
Then, after gradually removing their sorrow caused by separation, they all conversed amongst themselves and expressed their opinion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)